Saturday, August 13, 2011

positive and negative aura


kisi bhi vyakkti mien do tarah ki rays nikalti hain. Positive and negative.. aksar hamein kuch aisey vyakti miltey hain jinkey sath ghanton samay bitaney ka bad bhi vahan se uthney ka man nahi karta wahin kai bar kuch aisey log hotey jinka pas se guzarna bhi ek minute nahi gawara karta, Lagta hai bus ksis tarah se wahan se choomantar ho jaein. Akhir aisa kyun hai? jab bhagwan ne sabhi insaano ko eksaman banaya hai to fir kisi nature mein itney diffrences kyun?

kai bar man mein sawal atey hain ki akhir kisi ke sath koi kab tak pasotive ho sakta hai. My mom says hamesha achcha kam kartey rehna chahiye one should not hurt anyone by any means but i dont' get the answer as for how long can any one be positive towards a negative person. ye kahan ka insaaf hai ki ap achcha kartey jaao or samney wala apko hamesha hurt karta rahey, insult karta rahey. Sabra ki bhi koi seema hoti hai. Although i have seen so many people jo sirf or sirf logon ka bhala kartey rahey or unko badley mein sirf dhokha mila. Main ye nahi kehti ki agar log apko hurt hi kartey hain to ap bhi unka bura socho ya bura karo but the point is this ki kya seedhey logon ko is duniya mein khush rehney ka koi hak nahi??


I dnt know y i pick this topic today while writing the bolg.. bus aisey hi man kiya and likh diya.. hope ki mere sabhi apno k sath sirf or sirf positive aura hi rahey.. hamesha.. Have a good day..!!!

Monday, February 14, 2011

Unconditional Love



There is no such word as ''Loved''.Love has no past tense. If u ever stop loving someone , then u never truly loved them in the first place. मुझे नहीं मालूम कि ये पंक्तियाँ किसने लिखी हैं पर जिसने भी लिखी हैं एक दम सही लिखी हैं. प्यार का कोई पास्ट टेंस नहीं होता.. ये तो अनवरत चलता ही रहता है. कभी दोस्त के रूप में, कभी अभीभावक, कभी भाई बहन तो कभी प्रेमी के रूप में...

ये कहना गलत होगा कि आप किस्से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं क्यूंकि इनमे से किसी की भी तकलीफ आपसे देखी नहीं जाती.. यही तो है प्यार... दूसरों की ज़रा सी तकलीफ में आपकी रातों की नींद गायब हो जाती है.. हे भगवान् कहीं कुछ गलत न करना.. सब अच्छा रखना.. अगर उन्हे कुछ हो गया तो क्या होगा... सोच कर ही रूह कांप जाती है... पर कहते हैं न भगवान के घर देर है अंधेर नहीं.. फिर वो लोग जो किसी का अहित नहीं चाहते उनके साथ तो कुछ गलत हो ही नहीं सकता..


पर प्यार के इस मौसम में आज कल लोग कपड़ों की तरह पार्टनर बदलते हैं उससे इस बात का पता लगा पाना बड़ा मुश्किल है.. क्यूंकि ये प्यार बातों से शुरू होता है chatting  तक रहता है और फिर उससे अच्छा पार्टनर मिल जाने के बाद तू नहीं तो कोई और सही की तर्ज पर होती है एक नए पार्टनर की तलाश... पर ऐसा सभी के साथ नहीं होता कल ही newspaper में valentines डे पर article पढ़ रही थी जिसमे देवानन्द और सुरैया की प्रेम कहानी के बारे में पढ़ा... देव साहब भले ही उनके न हो सके लेकिन आज भी प्रेम वे उन्ही से करते हैं..

उसके बाद  एक magazine में पढ़ा की किस तरह एक काम उम्र का लड़का अपने से करीब दोगुनी उम्र की औरत से प्यार करता है..भले ही वे एक दुसरे के हो नहीं सकते पर एकदूसरे के प्रति अटूट श्रद्धा और प्रेम है... कुछ ऐसी ही कहानी ''दिल चाहता है''  फिल्म में अक्षय खन्ना और डिम्पल कपाडिया के बीच है.. यही तो है unconditional love अंजाम पता है फिर भी दिल में प्यार है.. क्यूँ है इसका जवाब किसी के पास नहीं.. है तो है..

प्यार के रिश्ते में तेरा मेरा कुछ नहीं होता.. बस होता है एक एहसास... अपनेपन का, सम्मान का, दोस्ती का, अनकही भावों का और कुछ ऐसा की अगर सामने वाला जान भी मांग ले तो उसे भी देने में एक सेकंड का वक्त न लगे,... पर खासियत ये हैं की जब जान ही एक दुसरे में बसती है तो कोई एक दूसरे को तकलीफ में भी नहीं देख पाता... तकलीफ एक को हो तो आंसू दूसरे की आंख में आते हैं.. बहुत खुश हैं तो भी आँखें नम हो जाती हैं बहुत दिनों बाद मिलने की ख़ुशी भी आँखों के ज़रिये ही ज़ाहिर हो जाती है... यही तो ख़ास बात है प्यार में... ये बस हो जाता है और जिससे भी होता है unconditional होता है...



And being in love if feels great because its a feeling with no complains and no demands.. only care and affection.. that's what makes us fall in love again and again. इसीलिए ये कहना की प्यार सिर्फ एक ही बार होता है... शायद गलत है... but its true that Love is unconditional.. SO enjoy the life and Love every one.. even ur enemies!!!   




Saturday, February 5, 2011

जीना कोई मुश्किल तो नहीं.....

एक दिन यूँ ही नेट पर सर्च करते हुए एक गाना सुना... जीना कोई मुश्किल तो नहीं.. बस जीने क़ी वजह चाहिए... एक बार सुना तो गाना ठीक ठाक लगा दूसरी बार सुना तो अच्छा लगा और तीसरी बार में जब इसकी गहराई समझ आने लगी तो सोचा क्यूँ न इसी गंभीर टॉपिक  पर कुछ हलके फुल्के अंदाज़ में अपनी बात लोगों तक पहुंचाऊँ.

आज के समय में लोगों के पास समय ही नहीं.. न परिवार के लिए न दोस्तों के लिए और न ही खुद के  लिए शायद यही कारण है क़ी अधिकतर लोग खुद से ही खुश नहीं. पर आस पास नज़रें डालें तो दुनिया में कई लोग हमसे भी ज्यादा दुःख में हैं. कुछ उसे ज़ाहिर कर देते हैं कुछ के लिए इसे अपनी हंसी के पीछे छुपा लेना कोई बड़ी बात नहीं... वो कुछ ऐसे लोग हैं जो जीवन से हारते नहीं उसमें जीने का जरिया ढूंढ लेते हैं. कोई खुद को खुश रखने के लिए सामाजिक कार्य में चला जाता है तो कोई यूँ ही दूसरों क़ी खुशियों में अपनी ख़ुशी ढूंढ लेता है.. किसी क़ी मुस्कराहट वापस ला कर, किसी को सहारा देकर तो किसी के दर्द को दूर कर. ऐसे लोग अपने लिए कुछ भी नहीं चाहते...और शायद जिंदगी क़ी लड़ाई में ऐसे ही लोग जीतते भी हैं.. इनके पास भले ही कुछ हो न हो.. लोगों क़ी दुआएं और अपनों का साथ होता  है जो कठिन से कठिन समय में भी उन्हे हारने नहीं देता.
इनके चेहरे ही हंसी देख कर एक सुकून मिलता है ऐसा सुकून जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.. एक ऐसा एहसास जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है.. अगर आपने अब तक किसी से लिए कोई भी काम निःस्वार्थ भाव से किया है तो उसका फल भले ही उस समय न मिले पर भगवान उसका फल ज़रूर देता है.. एक ऐसा मीठा फल तो आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाता है..

सो अब जीवन क़ी कडवी नहीं अच्छी यादों का हाँथ थामिए और चल दीजिये जीवन के एक हसीं सफ़र पर जहाँ सिर्फ और सिर्फ खुशियाँ हैं :)