Sunday, August 22, 2010

कभी तो need में मिलो यार....ऐसा क्या काम आ जाता है हर बार...


अंग्रेजी की एक कहावत है '' A friend in need is a friend indeed''. इसका सही मतलब तब समझ में आता है जब आपको सच में एक अदद मित्र की ज़रुरत हो और वो हर बार किसी न किसी काम से फँस जाये.. ऐसा एक बार हो तो समझ आता है पर हर बार होने लगे तो इसको क्या कहा जाये.. कहने को वो दोस्त है... हर बार साथ में मस्ती करना सुख दुःख बाँटना भले ही मिल न पाएं पर फ़ोन पर घंटो बतियाना..

सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है जब कहीं पर एक साथ जाने की पूरी प्लानिंग कर लो और ऐन टाइम पर उन लोगों को कोई काम पड़ जाए..पर क्या करें दोस्त है भाई थोड़ी देर नाराज़ ही तो हुआ जा सकता है.. मेरे साथ तो ये हमेशा ही हुआ है... मेरी दो सहेलियां....ओ god कभी भी मौके पर मिल जायें तो बात है.. इस बार भी यही हुआ...मुझे गुस्सा तो बहुत आया फिर सोचा कोई बात नहीं...अकेले हैं तो क्या गम है...

हम खुद ही एन्जॉय करेंगे...पर सही बताऊँ तो उनके बिना एन्जॉय करने में कोई मज़ा भी नहीं....आफ्टर all we are friends...Better luck next time....!!! यही बोल कर और सोच कर अपना मन बहला लती हूँ...इस संकट की स्थिति में आप क्या करते हैं??? 

4 comments:

  1. Theek baat hai. Lekin Intazaar aur uncertainty ka bhi alag hi mazaa hai.

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  2. अजी हम क्‍या करते हैं बस मन मसोस कर रह जाते हैं।

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  3. अब हर जगह वोही दोस्त नहीं हो सकता है जिसको आप चाहते हो .. पर कोई न कोई उस जगह को भर ही देता है ..

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