Tuesday, August 17, 2010

पावर ऑफ साइलेंस

''कुछ उनकी नज़र ने उठ के कहा, कुछ मेरी नज़र ने झुक के कहा, झगडा जो न बरसों में चुकता, तय हो गया बातों बातों में'' आँखों की भाषा ही ऐसी होती है. कई बार बिना कुछ कहे ही इंसान बहुत कुछ कह जाता है. सोचने का विषय है कि इंसान जब कुछ बोलता नहीं तो सामने वाले को महसूस कैसे हो जाता है....आप लोग मेरी बातों से कितना सहमत होंगे, ये तो नहीं पता..पर कई बार कुछ न कहना ही सामने वाले के लिए बहुत होता है...

इस बिन बोले जज्बात को ऑंखें सबसे पहले बयां करती हैं, बहुत दिनों बाद अगर किसी दोस्त से मिलिए तो सबसे पहले एक प्रश्नचिंह अरे तुम यहाँ कैसे ? किसी दोस्त ने आपका दिल दुखाया...आपको बेहद तकलीफ हुई....इस परिस्थिति में आपके गुस्सा करने से ज्यादा आपका चुप रह जाना उसे कचोटता है... अंततः इस बात को समझने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास होता है... है न कमाल की बात!!! आपने कहा तो कुछ भी नहीं पर उसका असर काफी तगड़ा हुआ...कभी आजमा कर देखिएगा






इसी तरफ आपके दिल का सबसे करीबी दोस्त जिससे आप कई दिनों बाद मिल रहे हों, पहले तो मिलते ही खूब सारी बातें बताने का मन करता है लेकिन सामने आते ही सिर्फ चेहरे पर एक मुस्कराहट होती है जो आपके अंदर के सारे एहसासों और जज्बातों को बयां कर देती है...
मैने अक्सर मंदिरों में भगवन के सामने भी लोगों को आंसु बहाते देखा है. ये तो नहीं जानती कि इसके पीछे कारण क्या रहा होगा पर मंदिर से लौटते वक्त उनके चेहरे पर आत्मीय संतोष और सुख की अनुभूति को भी महसूस किया है. यूँ तो कहने को बिना कहे भी बहुत कुछ कहा जा सकता है कुछ बातों को कहना नहीं पड़ता आँखों कि बोली ही अंतर्मन में चल रहे विचारों को बयां कर देती है. आपकी ख़ुशी, आपके गम, कोई परेशानी, यहाँ तक कि आपकी शैतानी भी आँखों के ज़रिये पकड़ में आ जाती है. शायद इसीलिए कहा जाता है ''स्पीच इज सिल्वर बट साइलेंस इज गोल्ड''
ऐसा नहीं है कि सिर्फ इंसानी जज्बात ही खुद को बयां कर पाते हैं!



कई बार प्रकृति भी अपने आप को जाहिर करती है..अक्सर मन में चल रहे अंतर्द्वंद को प्रकृति भी समझ जाती है या यूँ कहें कि आप अपनी भाषा उसे बताते नहीं बल्कि वो अपनी भाषा में आपका दर्द और ख़ुशी बांटती नज़र आती है आप खुश है तो लगता है सारी कायनात आपके साथ झूम रही है अगर आप दुखी हैं तो हजारों की भीड़ में भी आप खुद को तनहा पाते हैं..ऐसे में सिर्फ नदी का किनारा या पेड़ कि घनी छाँव के नीचे बैठ कर ही मन को सुकून मिल पाता है, अब आप निर्णय लीजिये क्या ये प्रयोग आप खुद पर भी करेंगे ???

3 comments:

  1. nayno ki vaani nayna hi jaane...gud. keep it up.

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  2. दीप्ति बहुत खूब....यह तो तुमने आज बड़ा "अंदरूनी"लिख मारा है,क्या बात...क्या बात...क्या बात...इस आलेख ने मेरे मन को छु लिया सच...!!

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