Wednesday, June 16, 2010

वो एक फ़रिश्ता ही तो थी ...

 ''एन्जल'' यानि फ़रिश्ता... अक्सर दुःख या तकलीफ में लोग फरिश्तों के आने या उनके आस पास होने की बात करते हैं. कई बार किसी की जिंदगी में अचानक ही आ जाने वाला व्यक्ति भी एक एन्जल कि तरह ही लगने लगता है. ताज्जुब की बात ये है कि वो कब ओर कैसे आपकी जिंदगी में शामिल हो जाता है आप जान भी नहीं पाते... लेकिन जब वो चले  जाते हैं... तो बहुत तकलीफ होती है... लगता है जैसे जिंदगी वीरान हो गई... लेकिन अंग्रेजी कि एक कहावत है...The show must go on... इसलिए वो चलती रहती है. साथ बिताये लम्हों को यादों में समेटे हुए... पलकों पर बिछाये हुए..... कभी होठों पर एक मासूम हंसी लिए हुए तो कभी तकिये के ऊपर आँखों के किनारों से निकले आंसुओं के साथ. आज एक ऐसे ही फ़रिश्ते के बारे में बताती हूँ जिस के बारे में मुझे पता चला.

बहुत भोली, मासूम, निश्छल हंसी वाली, बोलती तो लगता जैसे मंदिर में हजारों घंटियों को किसी ने एक साथ बजा दिया हो... बात करती तो  जैसे हजारों फूल झडते... उसकी टन-टन आवाज़ जैसे कानों में कोई मधुर रस खोल घोल देती हो. बात करने भर से आधी चिंता अपने आप ही दूर हो जाती... इस बच्ची के बारे में मैने जाना ट्रेन से यात्रा के दौरान एक शख्स से, जिसने उस फ़रिश्ते को काफी करीब से  देखा ... बात होती रही और मुझे एक कुछ नया मिल गया आप लोगों को बताने को.. एक पत्रकार होने के नाते वैसे भी लोगों से बात चीत होती ही रहती है ऊपर से मेरी बहुत सारे सवाल पूछने की आदत का फायदा मुझे कई बार ऐसी ही कहानियां और ब्लोग्स लिखने के काम आ जाता है. उस शख्स से जो भी बात हुई उसमें कुछ काल्पनिक बातों को जोड़ कर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ... उम्मीद है आप लोगों को मेरा ये प्रयास भी पसंद आयेगा.

आज से कई साल पहले कि बात है, रायबरेली से कुछ किलोमीटर दूर स्थित अमेठी गाँव में में एक ऐसी ही लड़की थी... उसकी उम्र होगी करीब १६-१७ साल. सबकी चहेती घर में सब कि लाडली किसी का दुःख उससे देखा न जाता... दादी के घुटने में दर्द हो तो तेल लेकर लगाने बैठ जाती. दादी कितना समझतीं की लड़कियां पर नहीं छूतीं इसपर वो तपाक से बोलती '' दादी मैं पैर छु नहीं रही हूँ आपको दर्द हो रहा है इसलिए दबा रही हूँ...''
''हाय भगवान् इस लड़की से कोई जीत नहीं सकता...''  

ऐसी ही थी मुस्कान...खुद खुश रहती ओर दूसरों को भी खुश रखती. पढ़ती तो बारहवी कक्षा में लेकिन दिल पांच साल के बच्चों जैसा था. पल में रूठ जाना पल में खुश हो जाना. बस एक ही समस्या थी उसके साथ. कभी किसी को अपनी तकलीफ के बारे में नहीं बताती थी... जिसका खामियाजा उसे और उसके सभी जानने वालों को भुगतना पड़ा... खैर ये बाद कि बात है.. अभी तो हम बात कर रहे हैं मुस्कान की मुस्कराहट की... उसका एक बड़ा भाई भी था क्षितिज... था तो उससे तीन साल बड़ा पर मुस्कान के लिए वो उसका भाई कम दोस्त ज्यादा था. स्नातक करने के बाद उसकी नौकरी एक एमएनसी कंपनी में लग गई थी सो उससे दिल्ली जाना पड़ रहा था. परिवार में सभी खुश थे. मम्मी, पापा, दादी, बस मुस्कान की मुस्कान कहीं गायब हो गई थी... एक भैया ही तो था जिससे वो लड़ भी लेती थी ओर झगड़ भी..
''हे छोटी तुझे ख़ुशी नहीं हुई क्या मेरी नौकरी लगने की''
''नहीं ऐसी बात नहीं है मैं तो सोच रही थी कि मैं अब मैं आपके friends के secret किसी बताउंगी ??''  
क्षितिज बहुत जोर से हंसा उसकी बात पर..
''अरे पगली इत्ती सी बात और तू मूह फुलाए बैठी है... तू मुझसे फ़ोन पर बात कर लिया करना''
''वो तो मैं कर ही लुंगी लेकिन आप बीजी हुए तो?''
''तब तू मुझे मुझे ,मैसेज कर दिया करना...वैसे भी दिनभर दोस्तों के मैसेज सुन सुन के मैं पक जाता हूँ ''
जोर से ''भैया...'' बोल कर मुस्कान ने क्षितिज के बाल खींच लिए...
क्षितिज ने मुस्कान के माथे को चूमा ओर अपने कमरे में चला गया
अगले दिन उसकी दिल्ली के लिए रवानगी थी सो वह जल्दी सो गया
सुबह उसकी आंख मुस्कान के फिर से बाल खीचने के बाद खुली...
''अरे! तू इतनी जल्दी कैसे उठ गई??''
''आप जा रहे हैं न ...मैने सोचा आपको आखरी बार चाए तो पिला दूं...''
''बोल तो ऐसे रही है कि अब मैं वापस आऊंगा ही नहीं.... ''
''अरे मेरा मतलब था कि अब पता नहीं आप कब आयें इसलिए सोचा की आपको चाए मैं ही बना कर पिला दूँ.. मम्मी ने आपके लिए खूब सारा सामान बनाया है...मीठी पूड़ी, ठेकुआ, मिर्ची का अचार, बसन के लड्डू...''
''अरे अब बस कर पूरा मेनू यहीं बता देगी क्या.. ला चाए दे..तू चल मैं नहा के आता हूं''  


         To be continued....





                                                                                                     NEXT PART OF THE STORY... 


उसके बाद क्षितिज चला गया नहाने और मुस्कान नीचे किचन में आ गई, मम्मी ठेकुआ बना कर रख रहीं थीं. वो पीछे ही खड़ी होकर बोली 
''मैं और कुछ करूँ?''
''अब क्या करेगी तू? सब तो मैने ही कर दिया....अच्छा एक काम कर मर्तबान से मिर्ची का आचार निकाल ला. उसे बहुत पसंद है न..''
मुस्कान दौड़ कर स्टोर रूम में गई और अचार निकाल लाई...
''अरे!! इतना सारा अचार क्यूँ निकाल लाई? ''
''आप ही ने तो कहा था कि भैया को अचार बहुत पसंद है...इसलिए निकाल लाई''
''अरे लड़की...अच्छा चल अब फटाफट तैयार हो जा भैया को छोड़ने नहीं जाएगी क्या ?''
''नही...मैं उनको जाते हुए देख नहीं पाऊँगी...'' यह कहकर मुस्कान उदास हो गई
तब तक क्षितिज नीचे आ चुका था
''क्या हुआ छोटी? ऐसे मुंह बना के क्यूँ खड़ी है?''
''कुछ नहीं आप जा रहे हो न...अच्छा नहीं लग रहा है...''
''अच्छा ठीक है फिर मैं नहीं जाता हूँ ''
''नहीं आप जाइये...मैं उदास नहीं होउंगी..''
''पक्का??''
मुस्कान ने जोर से क्षितिज को कंधे पे मारा और कहा ''एकदम पक्का''
''अच्छा चल अब जल्दी से मुझे नाश्ता करा दे वर्ना देर हो जाएगी''
नाश्ता करने के बाद क्षितिज ट्रेन पकडने के लिए रवाना हो गया.
इधर मुस्कान थोड़ी देर उदास रही फिर कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगी.

''अरे मुस्कान....''
''जी दादी....अभी आई''
''बेटा कॉलेज से लौटते समय मेरी आंख में डालने वाली दवाई लेती आना.''
''ठीक है दादी लेती आउंगी और कुछ तो नहीं चाहिए??''
''वैसे मेरी सुपारी भी ख़तम हो रही है थोड़ी सी लेते आना...''
''दादी आपके दांत तो हैं नहीं, फिर आप सुपारी खाती कैसे हैं??''
''खाती थोड़ी न हूँ....उसकी डली को सरौते से काट के उसको मुंह में रखकर चूसती रहती हूँ...''
''उससे क्या होगा? ''
''मुझे अच्छा लगता है... टाइमपास हो जाता है.. ''
''दादी टाइमपास ही करना है तो कार्टून नेटवर्क देखा करिए...मैं आपकी सुपारी नहीं लाऊंगी.. जा रही हूँ बाय''
''देखो कितनी नालायक है खुद ही पुछा कुछ और तो नहीं चाहिए और अब कह रही है नहीं लाऊंगी''
मुस्कान गेट कि तरफ जाते हुए बोली ''आपको टाइमपास करना है न.. आपके लिए पोपिंस या लोलिपॉप ले आउंगी दिन भर खाइएगा''
और मुस्कान हंसते हुए चली गई
''ओये मोटी आज हिस्ट्री के नोट्स लेकर आई?'' मुस्कान ने सना से पुछा
''ओह नो यार, अब तो मैडम एक्स शर्तिया क्लास से बाहर कर देंगी. दो दिन से उनको गोला दे रही हूँ आज नहीं बच पाऊँगी. लेकिन क्या करूँ यार एक बार में इतना सारा लिखवा देती हैं उसे करने में टाइम तो लगता ही है न''
''पर मैडम, शायद आप ही की कक्षा में हम भी पढते हैं और हमारे नोट्स पूरे बने हुए हैं...''
''आप महान हैं देवी जी आपको शत शत नमन...मेरे को अपने नोट्स दे दे न..''
'पागल है क्या.. मैं क्या दिखाउंगी...ऐसा कर जितना काम नहीं हुआ है उसकी फोटोकॉपी करवा ले.. ''
''हाँ यार गुड आइडिया...बोल दूंगी कॉपी खो गई..सही है यार तू सच्ची में बेस्ट है...''


ये तो हुई क्लास की बात लंच के समय मुस्कान और उसका पूरा गैंग असेंबली ग्राउंड में इकठ्ठा हो कर सारे टीचर्स की नक़ल उतारते थे ....
''ओये आज प्रिंसी की नक़ल उतारते हैं...??''
''छोड़ो यार टकले कि नक़ल क्या उतरना...सो बोरिंग''
''कोई नहीं यार आज एक दूसरे की ही नक़ल उतारते हैं '' रक्षित बोला
''ठीक है शुरुआत तुम ही करो...'' सना ने कहा
''ठीक है मैं ............ मैं मुस्कान की नक़ल उतारूंगा..''
''मेरी क्यूँ... मैने ही तो कांसेप्ट दिया मुझे ही टीज़ करोगे..''
''कम ऑन यार गेम ही तो है...''
''तो ठीक है फिर मैं भी रक्षित की नक़ल उतारूंगी''
''ठीक है यार अब गेम शुरू करो नहीं तो बेल बज जाएगी''
''लेकिन पहले मैं करुँगी'' मुस्कान ने फरमान जारी कर दिया
ग्राउंड के stage के पास सब गोला बना कर खडे हो गए और मुस्कान बीच में  आई...
इससे पहले कि वो कुछ कर पाती उसे जोर से चक्कर आया और वो वहीँ पर गिर पड़ी
''अरे मुस्कान क्या हुआ''
''जल्दी दे पानी लाओ... क्या हुआ मुस्कान...मुस्कान ऑंखें खोलो'' रक्षित बहुत घबरा गया
''देखा सबको डरा दिया न....'' मुस्कान ने धीरे से आंख खोल कर कहा
''तू पागल है क्या...मेरी तो जान ही निकाल गई थी..'' रक्षित गुस्से से बोला
''देखी मेरी एक्टिंग बढियां थी न.....'
''क्यूँ यार तुने ऐसे क्यूँ किया हमारी तो जान ही निकाल गई थी... तुझे कुछ हो जाता तो?'' सना गुस्से में बोली..
''चिल यार मैं ठीक हूँ...मुझे एक्टिंग मों अवार्ड जरूर मिलना चाहिए'' मुस्कान खिलखिला कर हंसते हुए बोली
'''अच्छा बाबा सॉरी अब कभी ऐसे नहीं करुँगी... मैं सही बताऊँ... मुझे सच में चक्कर आ गया था''
''चल चल अब jayada पका मत इस बार हम बेवकूफ नहीं बनने वाले'' रक्षित वहां से जाने लगा
'आज घर पे तुम्हारी शिकायत करूँगा'
'अच्छा सॉरी प्लीज़ मम्मी को मत बताना नहीं तो बहुत डांट पड़ेगी'
तब तक बेल बज गई और सब क्लास में चले गए. क्लास में भी मुस्कान को सिर में दर्द बना रहा लेकिन उसने किसी से कुछ कहा नहीं.

घर पहुंची तो भी थोड़ी थकी हुई लग रही थी
'क्या हुआ मुस्की... किसी से झगडा हुआ क्या?'
'नहीं माँ सिर में दर्द है?'
'क्या हुआ... टिफिन खाया था कि नहीं? '
'हाँ खाया था....'
'अच्छा चल मुंह हाँथ धो ले मैं दवाई दे देती हूँ'
दवा खाने के बाद मुस्कान को नींद आ गयी. वो जब उठी तो शाम के सात बज चुके थे...
उठते ही भैया का ख्याल आया दौड़ के गई और भैया को फ़ोन लगाने लगी..
'हेल्लो भैया...'
'हे लिल प्रिन्सेज़..कैसी है तू?'
'आप पहुँच गए दिल्ली?'
'अभी नही बेबी.. रात को पहुंचुंगा. तू बता क्या रहा आज स्कूल में?'
'एक दम बढियां मैने अपनी एक्टिंग से सबको डरा दिया.. रक्षित मुझ से नाराज हो गया है'
'चल कोई बात नहीं मान जायेगा, वो घर आया था या नहीं?'
'नहीं आया, मुझसे गुस्सा हो गया है न इसलिए...माँ से बात कराऊँ?'
'माँ भैया से बात कर लो... '
फ़ोन माँ को थमा कर वो कमरे में चली गई. बोर्ड की परीक्षा में अभी कई महीने बाकी थे लेकिन वो अभी से तैयारी कर रही थी. पढाई के बाद अपनी डायरी लिखती और फिर खाना खा के सो जाती. अगले दिन से फिर वही दिनचर्या. इसी तरह समय बीतता गया. चार महीने के बाद एक दिन स्कूल में फिर से उसे चक्कर आया.
'क्या हुआ मुस्कान तू ठीक तो है न?' रक्षित ने पुछा
'हाँ कुछ नहीं थोड़ा चक्कर आ गया..'
'पानी दूँ?'
'नहीं मैं ठीक हूँ...तुम चिंता मत करो'
'अरे ऐसे कैसे चिंता नहीं करूँ.. यु आर माई बेस्ट फ्रेंड. आज मैं तुम्हे घर छोड़ देता हूँ..ठीक है'
'ठीक है..मम्मी भी तुम्हे पूछ रही थीं'
'नमस्ते आंटी!'
'नमस्ते बेटा! अंदर आओ कैसे हो बडे दिनों के बाद आना हुआ'
'हाँ आंटी एग्जाम आने वाले हैं तो बिज़ी रहता हूँ...आंटी मुस्कान की  तबियत ठीक क्यूँ नहीं रहती?'
'पता नहीं बेटा अक्सर सिर दर्द कि शिकायत करती है सोच रही हूँ इसकी ऑंखें टेस्ट करवा दूँ'
'इसने आपको बतया है या नहीं..इसको अक्सर चक्कर भी आ जाता है...'
'नहीं तो सिर दर्द के बारे में ही बताती है हमेशा..मुस्की ओ मुस्की..'
'हाँ माँ? क्या हुआ अभी आती हूँ, चाए बना रही हूँ'
'तुने कभी बताया क्यूँ नहीं कि तुझे चक्कर भी आते हैं...'
मुस्कान ने गुस्से से रक्षित को देखा और इशारा किया तुमने क्यूँ बताया??
'उसे क्या धमका रही है.. मुझसे बात कर..भैया को बताया था?? उससे तो तेरी घंटों बात होती है..'
'मैने सोचा आप लोग बेवजह परेशान हो जायेगे इसलिए नहीं बताया'
'वाह रे लड़की दुनिया भर की बातें करती है लेकिन अपनी तकलीफ कभी नहीं बताती.. कल ही तुझे डॉक्टर के पास ले के जाती हूँ'
'माँ मुझे कुछ भी नहीं हुआ ये रक्षित तो ऐसे कहता रहता है..मैं बिलकुल ठीक हूँ'
'नहीं आंटी सच में इसको कई बार चक्कर आ चुका है..इसने एक बार एक्टिंग कर के हम लोगों को डरा भी दिया था'
'तुम चुप रहो माँ मुझसे बात कर रही हैं..'
'आंटी मैं चलता हूँ इसका पारा अभी बहुत गरम है कहीं फट गई तो परेशानी हो जाएगी...अरे अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है...'
ये सुनना था की मुस्कान को जोर से हंसी आ गई
'अच्छा आंटी चलता हूँ.. और तू तुझे कल स्कूल आने कि जरूरत नहीं..chekup करा ले..ठीक हो जा फिर आना समझी मैं रोज रोज घर छोड़ने नहीं आऊंगा..'
'ठीक ठीक है अब तुम जाओ मुझे शिक्षा देने कि जरूरत नहीं'
क्षितिज को जैसे ही ये बात पता चली उसने तुरन मुस्कान से बात की
'ए हिरोइन..तू बहुत बड़ी हो गई है क्या? तुने बताया क्यूँ नहीं तेरी तबियत ठीक नहीं है..'
'क्या भैया अब आप भी शुरू हो गए... जा तो रही हूँ कल डॉक्टर के पास..घबराइए नहीं इतनी जल्दी मरने नहीं वाली.. आप घर कब आ रहे हैं अब तो छे महीने हो गए आपको देखे हुए'
'आऊंगा यार अभी छुट्टी नहीं मिल पा रही है हो सकता है दो हफ्ते बाद आने का मौका मिल जाये..'
'जल्दी आइयेगा मैने आपके लिए एक अच्छी सी शर्ट खरीद कर रखी है'
'अच्छा बाबा अब तू सोजा रात बहुत हो गई है..ठीक है?'
'नहीं अभी नहीं..'
'क्यूँ ?'
'अभी डायरी लिखनी है न'
'ओह मैं तो भूल ही गया था. चल ठीक है लेकिन जल्दी सो जाना कल डॉक्टर से भी तो मिलना है. ओके बाय'

अगले दिन सुबह उठते ही मुस्कान को उल्टियाँ होने लगीं. माँ और रक्षित उसे डॉक्टर के पास ले गए. पूरा चेकअप करने के बाद डॉक्टर गंभीर स्वर में बोले
'इसको कितने दिनों से चक्कर आ रहा था?'
'पता नहीं डॉक्टर साहब... लेकिन अक्सर सिर दर्द बताती थी.'
कुछ देर शांत रहने के बाद डॉक्टर ने पुछा 'बच्ची के पिता कहाँ हैं?'
'अंकल की कार एक्सिडेंट में कई साल पहले ही मौत हो चुकी है, घर में सिर्फ दादी और आंटी ही रहते हैं भैया दिल्ली में जॉब कर रहे हैं. में उसका दोस्त हूँ.कोई दिक्काल हो तो आप मुझे भी बता सकते हैं'
'बच्ची ने आप लोगों से चक्कर के बारे में न बता कर गलती कर दी हो सकता है इसे सिर दर्द के बाद उल्टियाँ भी होती हों जिसने इसे कभी बताया नहीं..'
'बात क्या है डॉक्टर? मुस्कान ठीक तो हो जाएगी न?' रक्षित ने पुछा
'कुछ कह नहीं सकते.. बहुत देर हो चुकी है...आप बच्ची के बडे भाई को बुलवा लीजिये'
'प्लीज़ डॉक्टर साफ साफ बताइए कि क्या हुआ हैं मुस्कान को' मुस्कान की मम्मी ने पुछा
'उसे ब्रेन कैंसर है.. लास्ट stage .. सॉरी..'
ये सुनना था कि दोनों लोगों के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई..
जैसे ही क्षितिज को पता चला वो छुट्टी लेकर वापस आ गया. घर में दादी का रो रो के बुरा हाल था. मुस्कान की माँ को तो जैसे सांप सूंघ गया हो. उन्होने ऑफिस से छुट्टी कर ली. क्षितिज और रक्षित ने शहर के बडे से बडे डोक्टरों से संपर्क किया लेकिन कहीं कामयाबी नहीं मिली
शाम को मुस्कान के बेड के पास दोनों बैठे थे. उसे ड्रिप चढ़ रही थीं. क्षितिज ने जैसे ही उसके माथे पर हाँथ फेरा उसने आंख खोल दी और मुस्कुरा कर कहा
'बहुत देर कर दी आपने आने में.. मैं कब से आपका इन्तेजार कर रही थी'
आंख में आंसु लेकर क्षितिज बोला 'अब मैं आ गया हूँ न..जी भर के बात कर लेना..'
'अपने शर्ट देखी ? कैसी लगी? अपने उसे पहना क्यूँ नहीं?'
'अभी तो सबसे पहले तुझे ही देखने के लिया आया हूँ.. शाम को शर्ट देख लूँगा ओके'
'मुझे पता है आपको पसंद आयेगी..आपका पसंदीदा कलर है.. नीला..'
'मेरे लिए भी कुछ ली थी क्या?' रक्षित ने माहौल बदलने के लिहाज से उसे छेड़ा
'तुमको तो हमेशा मेरे से कुछ न कुछ चाहिए ही होता है..एग्जाम आ रहे है न तुम्हारे लिए एक पेन लिया है वो भी उसी के साथ है तुम ले लेना'
'थैंक्स यार तुम तो बहुत अच्छी हो' अपने आंसुओं को छिपाने कि कोशिश करते हुए रक्षित बोला.
'वो तो मैं हूँ..लेकिन अब मुझे नींद आ रही है. माँ कहाँ हैं?'
'माँ भी यहीं पर हैं'
'बोल बेटा मैं यहीं पर हूँ..'
'मुझे नींद आ रही है..आप प्लीज मेरा सिर दबा दो.'
माँ मुस्कान का सिर दबाने लगीं..मुस्कान को नींद तो आई लेकिन उसके बाद वो कभी नहीं उठी..
उसके जाने के बाद जैसे पूरा घर काटने को दौड़ता. क्षितिज ने दिल्ली छोड़ कर लखनऊ में काम करना शुरू कर दिया.. एक दिन मुस्कान की अलमारी में उसकी डायरी मिल गई..
डायरी के हर पन्ने पर उसके दिल्ली जाने के बाद के हर दिन का ब्यौरा था..उसकी दोस्तों से लड़ाई उसका बीमार पड़ना..दादी से की हुई बात.. सब के लिये हर बार खरीदा हुआ तोहफा..माँ के साथ बिताया हर पल सब कुछ उसने अपनी डायरी में लिख रखा था....अपनी इन्ही यादों kii निशानी को ही तो वो छोड़ गई थी जिसे पढ़कर सब हंस भी सकते थे और रो भी..उसे महसूस भी कर सकते थे और मिस भी...वो एक नन्हे फ़रिश्ते से काम नहीं थी जब तक रही खुश रही और सबको ख़ुशी देती रही.


Sunday, June 6, 2010

iss baar kewal photos hi upload kar rahi hun.....

 






                                                                                                                           


                                                                                                                                 










So, How r u feeling today??????????