Wednesday, May 26, 2010

क्या आज किसी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी आपने??

'' घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें किसी रोते  हुए बच्चे को हंसाया जाये'' निदा फाजली साहब की ये शायरी किसी को भी एक बार सोचने पर मजबूर कर सकती है. इस दौड़ भाग भरी ज़िन्दगी में किसी को दूसरों का हाल चाल लेने तक की तो फुर्सत है नहीं, आखिर कोई किसी की परवाह क्यूँ करे??
आज हर कोई एक दूसरे से आगे निकालने के चक्कर में मदद करना तो दूर उसकी मुश्किलें बढ़ाने में भी पीछे नहीं रहता. वहीँ कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके लिए दूसरों कि ख़ुशी ही अपनी ख़ुशी है ओर दूसरे का गम उनका गम. आप लोगों को लग रहा होगा कि आज मैं कोई बहुत बड़ा लेक्चर देने के मूड में हूँ. लेकिन खुश हो जाइये मैं ऐसा कुछ भी नहीं करने वाली. आज मैं लोगों कि ख़ुशी के बारे में बात करने जा रही हूँ.
कहा जाता है मुस्कराहट एक ऐसी भाषा है जिसे संसार का हर व्यक्ति समझ सकता है. कितनी भी बड़ी परेशानी हो किसी भी छोटे बच्चे की  मुस्कराहट के आगे कुछ भी मायने नहीं रखता.उसकी खिखिलाती हंसी सुनकर सारी चिंता कुछ देर के लिए बहुत दूर चली जाती है.
ट्राफिक में गाड़ी फंसी हो, हर तरफ से  होर्न की आवाज़ आ रही हो, चिलपों मची हो तो टेंशन मत लीजिये. एक बार गाड़ी के शीशे में अपनी शकल देख लीजिये आपको खुद ही हंसी आ जाएगी. उसके बाद आपको जाम में फंसे होने कि चिंता भी नहीं सताएगी.
सबसे ज्यादा मजा तब आता है जब कोई आपको फ़ोन करे ओर पूछे कहाँ से बोल रहे हो? इट्स वैरी नेचुरल हर कोई मुह से ही बोलता है.... to be continued....


शेष भाग...
कोई कितना भी परेशान हो उससे एक बार परेशानी के बारे में पूछ के तो देखिये..भले ही वो व्यक्ति कुछ बताये या न बताये, कम से कम थोड़ी देर के लिए वो अच्छा महसूस करेगा. इसी तरह अगर किसी को बिना किसी बात के हँसाना हो तो उसे कहिये कि तुम मेरे पांच गिनने तक हंस दोगे फिर गिनती गिनना शुरू कर दीजिये ..सामने वाले को शर्तिया हंसी आ ही जाएगी.
कई बार आपको हंसते हुए देखकर भी दूसरों को भी हंसी आ जाती है इसलिए आप खुश रहिये ओर दूसरों को भी खुश रखने कि कोशिश करिए.
कुछ लोगों को देखकर टेंशन अपने आप ही दूर होने लगता है.. जैसे छोटे बच्चे, आपका बेस्ट फ्रेंड, कॉमेडी शो, कोई अच्छा सा गार्डेन खूब सारे फूलों वाला, गाँव के झूलों पर पींगे बढ़ाते बच्चे ओर महिलाएं, दादी माँ कि पोपली हंसी, और ... हाँ!! भाई को परेशान करने से अच्छा टेंशन बूस्टर तो कुछ हो ही नहीं सकता हा हा हा हा!!! इस ब्लॉग तो मेरा भाई पढ़ेगा तो.....
खैर आगे बढते हैं... बात हो रही थी खुश रहने और दूसरों को भी खुश रखने की.. कई बार थोड़ी बहुत शैतानी करने से भी सामने वाले को ख़ुशी मिलती है यहाँ पर मेरा मतलब बातों की शैतानी से है..
 कुछ ऐसा बोलिए कि लोग हंसने पर मजबूर हो जाएँ लेकिन इस बात का भी ख्याल रखिये कि सामने वाले के दिल को कोई ठेस न पहुंचे क्यूंकि कई बार लोग हंसने हंसाने के चक्कर में इस बात को भूल जाते हैं कि उनकी बात किसी को चोट भी पहुंचा सकती है.. इसलिए जो भी कहिये जैसे भी हंसाने की  कोशिश करिए इस बात का ध्यान जरूर रखिये..
आखीर में इतना ही कहूँगी

'' DO ALL THE GOOD YOU CAN, TO ALL THE PEOPLE YOU CAN, AT ALL THE PLACES YOU CAN, IN ALL THE WAYS YOU CAN''
(DO GOOD, FEEL GOOD)
तो क्या आज आप किसी को फील गुड करायेंगे ??? :)


Sunday, May 2, 2010

अब आपकी बारी है...

आज ऑफिस से घर लौटते वक़्त एक ऐसी तस्वीर आँखों के सामने आ गई कि कुछ देर के लिए मन सोचने पर मजबूर हो गया कि  क्या कभी इस दिशा में भी कोई काम किया जा सकता है?? हुआ यूँ कि मैं अपने ऑफिस से जागरण चौराहे की ओर जा रही थी. टाइमस ऑफ़ इंडिया के ऑफिस के पास एक पान वाले कि गुमटी है. मैने देखा कि वहां से ७ से ९ साल कि बच्चियों जिनके हांथ में कूड़ा बीनने के लिए बोरा पकड़ा था उनमें से सबसे बड़ी लड़की ने एक रूपये का पान मसाला लिया, पुडिया को फाड़ा ओर तीनों ने उसके तीन हिस्से लगाये ओर अपनी भाषा में बात करते गुए तीनों वहां पडे हुए ईंटों पर बैठ गईं ओर आपस में हंसी ठिठोली करतीं रहीं. मुझसे रहा नहीं गया मैं वहां पर खडे हो कर उन्हे काफी देर तक देखती रही. तीनो कि निश्छल हंसी ओर अजीब सी भाषा में बातचीत जैसे कोई नया सुर निकल रहा था. तीनों आपस में बात करने में इतनी मगन थीं कि इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि मैं उनकी गतिविधियों को देख रही हूँ. वह तीनो थोड़ी देर में चली गयीं लेकिन मैं यही सोचती  रही कि आखिर क्यूँ इन बच्चों को तम्बाकू खाने की लत लग जाती है. गरीबी ओर बेकारी में क्या सिर्फ कुछ रूपये में मिलने वाली पुडिया इनकी भूख को रोक देती है??? सुबह से शाम तक ये कूड़ा बीनते हैं उसे बचने के बाद जो पैसे मिलते हैं उससे खाना मिलता है. फिर भी ऐसी कौन सी बात है कि मन रुक ही नहीं पता  है. 
ये तो बात हुई इन बच्चों की पर बडे भी कुछ कम नहीं. कई दोस्तों को सिगरेट पीने के लिए मना किया. एक ने बड़ी मुश्किल से सिगरेट पीना छोड़ दिया लेकिन फिर भी कुछ लोग हैं जो चाह कर भी नहीं छोड़ पा रहे हैं... मेरा कहना है उस पदार्थ का सेवन करना ही क्यूँ जिसको मुंह में खाने के बाद दोबारा पीक के रूप में थूका जाता है. जब पता है कि इसे थूकना ही है फिर भी लोग पता नहीं क्यूँ इसे खाते हैं?? सिगरेट के काश लेने का क्या फायदा जब उसे धुंए के रूप में अंदर जाना है या बाहर उड़ जाना है?? ये खुद के लिए तो नुक्सान दायक है ही सामने वाले के लिए भी खराब होता है. टाक्सी हो या ऑटो या फिर कार और बस जो लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं उसकी पीक सडकों पर थूकते हैं. ऑफिस के बाथरूम हों या फिर दीवारों के कोने, ये भी उनसे अछूते नहीं रह जाते. सोचिये नवाबों के शहर में आकर घूमने वाले लोगों को ये कितना खराब लगता होगा कि इस शहर के लोग अपने ही शहर को साफ़ सुथरा नहीं रख सकते... अभी कुछ महीनों पहले ही ऑस्ट्रालिया के एक नागरिक से बात करने का मौका मिला जब उससे इस शहर के बारे में पुछा तो वह बोला यहीं पर लोग अच्छे हैं, बहुत जल्दी दोस्त बन जाते हैं दूसरों की मदद भी करते हैं यहाँ का खाना लाजवाब  है..  मैने उससे पुछा यहाँ की कोई एक चीज़ ऐसी चीज़ जो आपको पसंद नहीं आयी?? उसने कहा,''यहाँ की सड़कें साफ़ नहीं होतीं... कई बार लोग थूकते हैं जिसकी गन्दगी देखकर मन ख़राब हो जाता है! ''
बात तो सही है गन्दगी जो करता है उसे समझ नहीं आता कि उससे गलती हुई कहाँ?? खैर मेरा मानना है कि अगर हम चाहते हैं कि इस समस्या का समाधान हो तो हम सबको इस बारे में सोचना पड़ेगा. मेरी कोशिश यही रहती है कि मैं लोगों को धुम्रपान न करने की सलाह देती रहूँ. जो लोग तम्बाकू का सेवन कर के सड़कों पर थूकते है उन्हे भी कई बार समझती हूँ भले ही उम्हे बुरा लगे.. आपसे भी इतना ही अनुरोध है कि अगर हो सके तो लोगों को धूम्रपान के नुक्सान बताइए. इसकी शुरुआत अपने किसी खास व्यक्ति से की जा सकती है. मैने तो एक व्यक्ति कि सिगरेट बंद करवा दी आगे भी कोशिश जारी है... अब आपकी बारी है...