Tuesday, April 6, 2010

कभी बोलती आँखों को देखा है...

आज धुप  कुछ ज्यादा ही तेज थी. सूर्य देवता के बहुत ज्यादा आशीर्वाद से बचने  के लिये मैने चेहरे पर स्टोल  और हांथों में  लम्बे दस्ताने पहने थे. टैक्सी के लिये इंतज़ार  कर रही थी की इतने में  एक टैक्सी मेरे सामने ही आकर  रुकी . मै उसमें  बैठ गई .सबसे कोने में एक बुजुर्ग  व्यक्ति बैठे था. मै बीच में थी और बगल में 'एक महिला बैठी थी! उनकी गोद में बैठी हुई एक नन्ही सी बच्ची जिसकी  उम्र  करीब 10 महीने की थी, उसने  मेरी तरफ ऐसे आश्चर्य  से देखा, मानो उसे  मै  किसी अलग ग्रह की प्राणी लगी. मेरी तरफ  देख कर वो हंसी और मेरा चेहरा देखने  लगी, ये अलग बात है की  उसे मेरा ढका हुआ चेहरा ही दिखाई दिखा. शायद  वो मेरे चेहरे को देखने के लिए बेताब हो रही थी. मैने समय काटने के लिए उससे बात करनी शुरू कर दी तो पता चला की वो बोल भी नहीं पाती. फिर भी उसने अपनी भाषा में मुझे बहुत कुछ बताने की कोशिश की! मैं उससे बात करती रही और वो अपनी गिन गिन भाषा में पता नहीं क्या बोलती रही! उसकी नीली रंग की छोटी सी टोपी जिसके अंदर  उसके  हल्के  से बाल उसकी  प्यारी  और मासूम आँखों पर बार बार आ रहे थे! जिसे  मैने  जब दस्ताने पहने  हांथों  से ठीक किया तो वह धीरे से हंसी!  उसके  आगे के चार दांत,  जो बहुत ही छोटे  छोटे से थे, दिखने  लगे! फिर वो बहुत देर तक मेरी आँखों में देखती  रही, क्यूंकि चेहरे का वही  भाग  खुला  था.  मैं पूरे रास्ते उससे बातें करते हुए आई! वह भी ऐसे देखती रही जैसे मेरी सारी बात समझ रही हो! फिर उसने मेरे हाँथ की एक ऊँगली को कस कर पकड़ लिया और तब तक पकडे रही जब तक की हम टाक्सी स्टैंड तक पहुँच नहीं गए! फिर मैने उससे अनुरोध किया  ... प्लीज़ बेबी अब तो मेरी ऊँगली  छोड़ दो ... मुझे  जाना है... वो बहुत जोर से खिलखिलाई, उसकी  हंसी बहुत प्यारी  थी .... बिलकुल  एन्जल की तरह  .... हाँ वो नन्ही परी ही तो थी  ... जिससे मैं आज  मिली थी ... जाते  जाते  उसने  मुझे  जोर  जोर  से हाँथ  हिला  कर  टाटा  किया  या आँखों ही आँखों में कहा... फिर मिलेंगे.

19 comments:

  1. Dear Deepti... your Story is very nice..cute..loving and charming..

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  2. Very nice, cute, loving and charming experience..

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  3. हक़ीक़त की निशानी चंद ख़्वाबों में नहीं मिलती

    हमारे दर्द को महसूस करने की ज़रूरत है

    हमारी ज़िंदगानी इन किताबों में नहीं मिलती

    Kya likha hai..

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  4. bahut sundar... bas ese hi haste rahiye or sabko
    hasate rahiye... ham bhi kosis karenge aapke padchinho par chalne ki...

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  5. ATI sunder...you have potential to be an excellent story teller. Incidently you have felt,touched,appreciated and absorbed the most pious love in innocent children. Keep writing and achieving newer and unapproachable heights. God!Bless you.

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  6. Writing is a Art of expression and I have seen this in your story, If you have seen the innocence in 10 month child that means that you have sweet, pure and kind heart.

    By this art and profession..you can do a lot to this "Heartless" world.

    So keep it up..

    Harry Singh (Durban, SA)

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  7. Keep away from people who try to belittle your ambitions. Small people always do that, but the really great make you feel that you, too, can become great.

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  8. "Great works are performed, not by strength, but by perseverance."

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  9. very nice and good story.. keep it up

    Chupa Rustam..

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  10. Thank you so much for all your response. Main or bhi behtar or achchey vishyon or anubhavon par likhney ki koshish karti rahungi.

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  11. good work !! must keep it up !!

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  12. Aap nay oor kuck nahi likha...

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  13. likhungi, bilkul likhungi. Intezar kariye or aisey hi mera blog padh kar utsah vardhan kartey rahiyey. :)

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  14. GREAT STORY, WE SHOULD ALSO SPREAD AWARNESS ABOUT PAN MASALA OR GUTKA, WHICH WILL SAVE OUR LIFE AS WELL AS KEEP OUR CITY CLEAN, KEEP THE EFFORT WE ALL ARE WITH U, THANKS, CHEF HARMEET

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  15. Actually this problem of Poverty and Tobacco has intricate connection. Indivdual steps as you are taking will go a long way but the worst part is that besides awareness in these children we have tried even free vocational training but they donot want to work and only resort to easier ways whuch also includes begging in some time of the day. I shall point out Deepti that you must go in early morning to a tea stall in LALBAGH which is very popular and see the condition of young girls and small boyes or children begging with those who are taking tea etc. I have tried so many times to get them some job but they refuse and then the POVERTY AND TOBACCO will not relent..unless all of us become behind them to change their attitude.
    Prof.Rama Kant

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  16. Very emotional story and a excellent presentation. Thanks.

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